दिल्ली : जेएनयू में पीएचडी दाखिले में आरक्षण नियमों का हो रहा उल्लंघन : SFI - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

दिल्ली : जेएनयू में पीएचडी दाखिले में आरक्षण नियमों का हो रहा उल्लंघन : SFI

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नई दिल्ली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने बुधवार को आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी दाखिलों में आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया है। एसएफआई ने दाखिला प्रक्रिया में तत्काल सुधार की मांग करते हुए दावा किया कि उसकी शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने संज्ञान लिया है। ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा की पूर्व सदस्य बृंदा करात, पश्चिम बंगाल की पूर्व मंत्री देबलीना हेम्ब्रम और जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की उपाध्यक्ष गोपिका बाबू समेत कई नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के दाखिला विवरणिका में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित सीट का प्रावधान नहीं किया गया है। एसएफआई ने दावा किया कि एनसीएससी ने 29 सितंबर को की गई शिकायत के संबंध में जानकारी और कार्रवाई का ब्योरा मांगते हुए आठ अक्टूबर को जेएनयू के कुलसचिव को नोटिस जारी किया था। संगठन ने आरोप लगाया कि 23 अक्टूबर की समयसीमा तक विश्वविद्यालय की ओर से जवाब नहीं मिलने पर आयोग ने 27 अक्टूबर को अंतिम चेतावनी जारी कर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। एसएफआई ने कहा कि एनसीएसटी ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। संगठन ने आरोप लगाया कि जेएनयू ने दाखिले के तीन माध्यमों यूजीसी-नेट, यूजीसी-नेट-जेआरएफ और जीएटीई (गेट) के तहत कुल 711 नियमित सीट के लिए विज्ञापन दिया था। एसएफआई ने दावा किया कि एसटी उम्मीदवारों के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान के तहत कम से कम 53 सीटें निर्धारित की जानी चाहिए थीं, जबकि दाखिला विवरणिका में केवल 38 सीटें हैं। इस तरह करीब 15 सीटें कम रखी गईं हैं। संगठन का आरोप है कि इसी तरह, विवरणिका में एससी उम्मीदवारों के लिए 103 सीटें बताई गईं जबकि 15 प्रतिशत आरक्षण नियम के तहत लगभग 107 सीटें होनी चाहिए थीं। इसके अलावा, दिव्यांगों के लिए 17 सीट तय की गई जबकि नियमों के तहत यह करीब 36 होनी चाहिए थीं। एसएफआई ने इन विसंगतियों के लिए सीट आवंटन की एक ऐसी पद्धति को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें आरक्षण का प्रतिशत विश्वविद्यालय के प्रत्येक केंद्र और अलग-अलग विषयों पर अलग-अलग लागू होता है। इनमें से कई केंद्रों और विषयों में सीटों की संख्या कम है। संगठन ने दावा किया कि नेट, नेट-जेआरएफ और गेट के तहत दाखिले के लिए सीटों को अलग-अलग बांटने के कारण कई केंद्रों ने एससी और एसटी के उम्मीदवारों के लिए कोई सीट घोषित नहीं की। उसने आरोप लगाया कि मौजूदा दाखिला प्रक्रिया में 29 केंद्रों ने इन दोनों श्रेणियों के लिए शून्य सीटें रखी हैं।

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