उन्होंने वीडियो में कहा, ‘‘मैं इस सरकार से एक सवाल पूछना चाहता हूं। हमारे देश के युवाओं का हौसला तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए आप और क्या करेंगे? आप कितना करेंगे? आप कहां तक जाएंगे?’’ अभिनेता शाह (76) लगातार वीडियो पोस्ट करते रहे हैं। वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उन्होंने जुलाई में नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके की भी आलोचना की थी। पिछले सप्ताह शाह ने सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान के छात्रों का भी समर्थन किया था, जो परिसर में हिंसक घटनाओं के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आमिर अजीज की लोकप्रिय कविता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, फिर सत्यजीत रे फिल्म संस्थान और अब जामिया मिल्लिया। छात्रों पर जो अत्याचार किए जा रहे हैं, उन्हें याद रखा जाएगा। सब कुछ याद रखा जाएगा।’’ उन्होंने बिस्मिल अजीमाबादी की प्रसिद्ध शायरी ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’ की पंक्ति ‘‘देखना है जोर कितना बाजू-ए कातिल में है’’ भी सुनाई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने छात्र संघ चुनावों के लिए निश्चित तारीख घोषित करने और छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने की स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की है। छात्र संघ के चुनाव 2006 से नहीं हुए हैं।
नई दिल्ली। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने स्वयं को एक गौरवान्वित ‘‘दिमागी नक्सल’’ बताते हुए छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों का समर्थन किया और सरकार की आलोचना की।शाह ने मंगलवार को फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में गुस्सा जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने और देश के युवाओं का ‘‘हौसला तोड़ने’’ की कोशिश कर रही है। शाह ने ‘दिमागी नक्सल’ लिखा एक बैज भी लगा रखा था, जिसे उन्होंने कैमरे के सामने दिखाया। शाह ने हिंदी में कहा, ‘‘मैं गर्व से घोषणा करता हूं कि मैं ‘दिमागी नक्सल’ हूं। मुझे नहीं पता कि पहरेदारों ने मेरे जैसे लोगों को और कौन-कौन से उपनाम दिए हैं—राष्ट्रविरोधी, ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग और न जाने क्या-क्या।’’

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