अधिवक्ता अभीक चिमनी ने कहा कि बचाव पक्ष अगली सुनवाई में नोटिस का जवाब देने से पहले उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच करेगा। चिमनी ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, अदालत ने कुछ महत्वपूर्ण मानदंड तय किए हैं। उसने स्पष्ट किया है कि शांति भंग होने की आशंका जताने के लिए अधिकारियों ने जिन सामग्रियों पर भरोसा किया है, वे सभी हमें उपलब्ध कराई जानी चाहिए। आज हमने मजिस्ट्रेट के समक्ष उच्च न्यायालय का फैसला प्रस्तुत किया, जिसके बाद हमें सभी दस्तावेज दे दिए गए। अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को है और उससे पहले हम इनकी जांच करेंगे।’’ उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे हिरासत में लिये गए व्यक्तियों के उस अधिकार को रेखांकित करती हैं, जिसके तहत उन्हें अपने ऊपर लगाए गए आरोपों की जानकारी मिलनी चाहिए और उनका जवाब देने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। इससे पहले दिन में बोरा ने दोहराया कि वह शांति मुचलके पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एहतियाती कानूनी कार्यवाही के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी भी शर्त पर सहमत नहीं हैं। हम बॉण्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।’’
नई दिल्ली । ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा शनिवार को मंदिर मार्ग पुलिस थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष पेश हुईं। इससे एक दिन पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस के उस नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्हें एक जमानतदार के साथ 10,000 रुपये का ‘शांति मुचलका’ भरने का निर्देश दिया गया था। उनके वकील ने बताया कि कार्यवाही के दौरान मजिस्ट्रेट ने उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए बोरा के वकील को उन दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराईं, जिनके आधार पर पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका जताई थी। साथ ही, उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए 29 अक्टूबर तक का समय दिया गया।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें