प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दशकों में समय बदला है, देश के सामने नई चुनौतियां उभरी हैं और समाज में नई बुराइयां सामने आई हैं। आज इनसे निपटने की जिम्मेदारी हम सभी पर है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट करना होगा। हमें अपने नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने के प्रति जागरूक और प्रेरित करना होगा। हमें प्रत्येक व्यक्ति को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से जोड़ना होगा। इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमें और अधिक सक्रिय होना होगा।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत राष्ट्र भारतीय संस्कृति की जन्मभूमि है और देश के अस्तित्व का आधार है। उन्होंने कहा, ‘‘चिन्मय मिशन के प्रयासों से आज लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम कर रहे हैं। ये युवा भारतीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।’’ शुक्रवार से शुरू हुए इस तीन दिवसीय आयोजन में भारत और विदेशों से आए 9,000 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। यह आयोजन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर चले समारोहों का समापन है। स्वामी चिन्मयानंद ने 1951 में इस वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता के ज्ञान को सभी लोगों के लिए सुलभ बनाना था।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को उभरती सामाजिक बुराइयों और नई चुनौतियों से निपटने, समाज को विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एकजुट करने तथा नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। मोदी ने यहां चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। उन्होंने कहा कि ‘चिन्मय’ का अर्थ शुद्ध चेतना है। इसकी स्थापना स्वामी चिन्यानंद ने की थी, जिनकी दशकों लंबी यात्रा दैवीय संकल्पों से भी प्रेरित रही।

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