दिल्ली : शीर्ष अदालत ने प्रथागत कानून के प्रावधान को चुनौती वाली जनहित याचिका पर त्रिपुरा सरकार से जवाब मांगा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

दिल्ली : शीर्ष अदालत ने प्रथागत कानून के प्रावधान को चुनौती वाली जनहित याचिका पर त्रिपुरा सरकार से जवाब मांगा

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर त्रिपुरा सरकार और त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) से जवाब मांगा, जिसमें 2017 के एक प्रथागत कानून के प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिका में जमातिया प्रथागत कानून, 2017 की धारा 143 की वैधता को चुनौती दी गई है। यह धारा किसी महिला को बहला-फुसलाकर ले जाने और उससे दुष्कर्म के मामलों में आर्थिक दंड से संबंधित है। आरोप है कि इस प्रावधान के तहत दुष्कर्म से जुड़े मामलों के आरोपियों को प्रथागत न्याय व्यवस्था के माध्यम से केवल आर्थिक दंड देकर बच निकलने का मौका मिल सकता है। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मधुमिता भट्टाचार्य की ओर से दायर याचिका पर राज्य सरकार और टीटीएएडीसी से जवाब मांगा। पीठ ने इस याचिका को पहले से लंबित एक मामले के साथ संबद्ध कर दिया। अधिवक्ता शौमेंदु मुखर्जी के माध्यम से दायर याचिका में संबंधित प्रावधान को संविधान के विपरीत घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिका में 2017 के कानून को लागू किए जाने से संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड उच्चतम न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। जिस प्रावधान को चुनौती दी गयी है, उसके तहत यदि कोई पक्ष पारंपरिक जमातिया आध्यात्मिक या सामुदायिक नेताओं अथवा विवादों का निपटारा करने वाले व्यक्तियों के सुनाए गए फैसले से असंतुष्ट है, तो वह उचित औपचारिक मंच का रुख कर सकता है। टीटीएएडीसी ने संविधान की छठी अनुसूची के तहत 2017 का यह कानून पारित किया था। इसका उद्देश्य जमातिया समुदाय की पारंपरिक प्रथाओं और विवाद निपटाने की व्यवस्थाओं को संहिताबद्ध करना था।

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