सीहोर : श्री लक्ष्मी-नृसिंह मंदिर में पांच दिवसीय श्री यंत्र महोत्सव, आज पंचामृत से होगा विशेष अभिषेक - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 7 नवंबर 2026

सीहोर : श्री लक्ष्मी-नृसिंह मंदिर में पांच दिवसीय श्री यंत्र महोत्सव, आज पंचामृत से होगा विशेष अभिषेक

  • छोटी दीपावली पर संत माधवदास महाराज के मार्गदर्शन में हुई कुमकुम अर्चना, रात्रि में होगी विशेष पूजन-अर्चना

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सीहोर। शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन श्री लक्ष्मी-नृसिंह मंदिर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी पांच दिवसीय भव्य श्री यंत्र महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के अंतर्गत छोटी दीपावली के पावन अवसर पर शनिवार को संत माधवदास महाराज के मार्गदर्शन में श्री यंत्र की विधि-विधान से कुमकुम अर्चना की गई। इस धार्मिक अनुष्ठान में आचार्य पंडित कुणाल व्यास, संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा, पवन केवट सहित श्रद्धालु शामिल हुए। महोत्सव के क्रम में रविवार को श्री यंत्र का पंचामृत से विशेष अभिषेक किया जाएगा तथा रात्रि में विधि-विधान से पूजन-अर्चना होगी।


श्री यंत्र की उपासना से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है : संत माधवदास महाराज

मंदिर के अधिकारी पुजारी संत माधवदास महाराज ने बताया कि श्री यंत्र को मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली धार्मिक प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि श्री यंत्र की विधि-विधान से स्थापना और नियमित पूजा-अर्चना करने से साधक को धन-समृद्धि और सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्री यंत्र पर कुमकुम अर्चना माता त्रिपुरसुंदरी और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाने वाला शुभ अनुष्ठान है। पांच दिवसीय महोत्सव में श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।


रूप चौदस पर दीपदान का है विशेष महत्व

संत माधवदास महाराज ने बताया कि दीपावली से एक दिन पहले रूप चौदस का पर्व मनाया जाता है, जिसे नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली और काली चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूजा-अर्चना और दीपदान करने से जीवन की परेशानियों और पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन घर के विभिन्न हिस्सों में यमराज के निमित्त दीपक जलाने और दीपदान करने की परंपरा है। मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी असुर नरकासुर का वध कर उसके बंदीगृह में कैद 16 हजार 100 कन्याओं को मुक्त कराया था। इसी प्रसन्नता में लोगों ने दीपों की श्रृंखला सजाई थी। तभी से छोटी दीपावली पर दीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा चली आ रही है। मंदिर में आयोजित श्री यंत्र महोत्सव के दौरान भी दीपावली के पर्व को लेकर विशेष उत्साह और धार्मिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है।

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