पीठ ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार ने एक वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल की है, जिसके अनुसार इस मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया गया है। इसे देखते हुए हम रिट याचिका और इससे जुड़े अन्य मामलों का निपटारा करते हैं तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश देते हैं कि वह कानून के अनुसार इस मामले में आगे की कार्यवाही करें।” उसने कहा, “चूंकि, मामले में जनहित का पहलू शामिल है, इसलिए रिट याचिकाकर्ताओं को न्यायिक मजिस्ट्रेट की सहायता करने की अनुमति दी जाती है। यह अनुमति उसी आधार पर दी गई है, जिस तरह कानून किसी अपराध के पीड़ित को अदालत की सहायता करने का अधिकार देता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि किसी के साथ कोई अन्याय न हो, इसलिए यह अदालत मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है।” सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एसआईटी की जांच में पता चला है कि मंदिर में चढ़ावे का हेरफेर गिनती की प्रक्रिया के दौरान हुआ। उन्होंने कहा कि चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में शामिल कुछ आरोपियों ने चोरी की रकम संपत्ति में निवेश की, जबकि कुछ ने इसे बैंक में जमा करा दिया। मेहता ने कहा कि जांचकर्ता बैंकों में पैसों के लेन-देन का पता लगाने में सफल रहे हैं और संपत्ति में निवेश की बात करें तो एक मामले में सौदे से जुड़े बिक्री विलेख में 15 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया था, जबकि उस संपत्ति की वास्तविक कीमत 50 लाख रुपये थी। उन्होंने कहा कि बाकी रकम संभवत: नकद में चुकाई गई थी और यह चढ़ावे में हेरफेर के जरिये आई थी। मेहता ने पीठ को बताया कि एक ऑडिट भी किया गया था। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि जांच के दौरान सभी कलाकृतियां और अन्य चीजें सुरक्षित पाई गईं।
जब प्रधान न्यायाधीश ने भविष्य को लेकर चिंता जताई, तो मेहता ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं। पीठ ने ‘अखिल भारत हिंदू महासभा’ और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता वरिंदर कुमार शर्मा से कहा कि अगर उनकी कोई शिकायत है, तो वे उसे निचली अदालत के समक्ष उठाएं। न्यायालय ने उस याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें यह तय करने का अनुरोध किया गया था कि क्या राम मंदिर का निर्माण उसी भूमि पर किया गया है, जो अयोध्या विवाद से जुड़े मुख्य मामले में सुनाए गए फैसले में निर्धारित की गई थी। इससे पहले, राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने 21 सितंबर को शीर्ष अदालत को बताया था कि वह 25 सितंबर को या उससे पहले अपना पहला आरोपपत्र दाखिल करेगी। न्यायालय ने एसआईटी से जांच जल्दी पूरी करने और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने को कहा था। उसने एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह मामले की जांच में हुई प्रगति के बारे में अपनी वस्तुस्थिति रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह सहित कई याचिकाकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया। उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का अनुरोध किया है।

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