दरभंगा : जॉर्ज साहब का व्यक्तित्व था अनोखा :- प्रो० विनोद - Live Aaryaavart

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शनिवार, 30 जनवरी 2021

दरभंगा : जॉर्ज साहब का व्यक्तित्व था अनोखा :- प्रो० विनोद

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दरभंगा। 30 जनवरी, पूर्व विधान पार्षद प्रो० विनोद कुमार चौधरी ने आज यहां कहा की जॉर्ज फर्नांडीस का व्यक्तित्व अनोखा था सामने वाले पर उनके व्यक्तित्व  का अमिट छाप पड़ता था। पूर्व विधान पार्षद ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे कुछ छन उनके सानिध्य में रहने का मौका मिला। प्रो० चौधरी ने कहा कि कल उनकी पूण्य तिथि पर सोशल मीडिया पर एक समाचार (अपनों ने ही भुलाया जॉर्ज को) देखकर आहत हुआ। मेरा मानना है जॉर्ज साहब के विलक्षण व्यक्तित्व के कारण कोई उन्हें भुला नहीं सकता है, राजनीतिक कारणों से भुलाना अलग बात है।

      

जॉर्ज साहब के साथ बिताए कुछ लम्हे आज भी मेरे मानस पटल पर यथावत है। घटना उन दिनों की है जब पूरे बिहार में श्री लालू यादव जी की सरकार को हटाने के लिए ये लोग मुहिम चला रहे थे। माननीय नीतीश कुमार की इस क्रम में जयनगर में एक बड़ी सभा थी और मेरे दिवंगत पिता स्व० उमाकांत चौधरी पहले ही सभा के लिए जयनगर जा चुके थे। 8:00 बजे के करीब मेरे डेरा पर पटना से एक फोन आया जिसमें नीतीश जी के बदले जॉर्ज साहब के जयनगर जाने की बात कही गई और मुझे उनके साथ जयनगर तक जाने का निर्देश दिया गया। मैं उन दिनों पिताजी के साथ ही रहता था। निर्देशानुसार मैं अपने पत्रकार मित्र श्री प्रमोद गुप्ता के साथ जॉर्ज साहब को लेने मब्बी से आगे बढ़ा मुझको यह कहा गया था जॉर्ज साहब टोयोटा गाड़ी से पटना से विदा होंगे। मैंने एक टोयोटा गाड़ी को जब पटना की ओर से आते देखा तो हाथ दिखला कर उसको रोका। जॉर्ज साहब ड्राइवर के बगल में अगली सीट पर बैठे हुए थे और गाड़ी में कोई दूसरा नहीं था मेरे हाथ दिखाने पर गाड़ी रुकी और जॉर्ज साहब ने बड़े सहज भाव से कहा आप "विनोद चौधरी" हैं ! मेरे हां कहने पर उन्होंने मुझको गाड़ी में बैठने के लिए कहा। पिछली सीट पर लगभग दर्जन भर पुस्तकें रखी हुई थी। मैं भी उसी में समा गया कुछ बातें होने के बाद जॉर्ज साहब के हाथ में कोई पुस्तक थी वह पढ़ने लगे। मैंने हिम्मत जुटा कर उनसे पूछा मेरा एक मित्र जो यूएनआई का रिपोर्टर है आपसे 2 मिनट बात करना चाहता है और वह बेला मोड़ पर रुकेगा । बड़े सहज भाव से जॉर्ज साहब ने मेरी बात स्वीकार कर ली और प्रमोद जी को उन्होंने बात करने का समय दिया। प्रमोद जी ने आपातकाल के संबंध में कुछ बातें उनसे की और जो समाचार उन्होंने उन बातों के आधार पर बनाया वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से प्रसारित एवं प्रकाशित हुई जो चर्चा में रही ।

          

जॉर्ज साहब ने मुझसे पूछा की आप किस विषय के अध्यापक हैं जब मैंने उन्हें समाजशास्त्र की बात कही तो उन्होंने कार्ल मार्क्स के कुछ सिद्धांतों की चर्चा की तथा कहा कि इसे गंभीरता से पढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने समाजशास्त्र के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान स्व० प्रो० योगेंद्र सिंह के विषय में भी कुछ देर तक बातें की। स्व० जॉर्ज साहब समाजवादी चिंतक थे और उन्होंने मुझसे समाजवादी आंदोलन के संबंध में भी कुछ बातें कहीं ! उन्होंने पंडित राम नंदन मिश्र के संबंध में भी मुझसे हालचाल लिया। रास्ते भर लगभग जॉर्ज साहब किताब पढ़ते रहे और बीच में कभी-कभी मिथिलांचल के समाजवादियों के बारे में जिज्ञासा करते रहे। जॉर्ज साहब का व्यक्तित्व ही कमाल का था जब वे बाजपेई जी की सरकार में रक्षा मंत्री बने तो सियाचिन तक की यात्रा कर सेना का मनोबल बढ़ाया। मेरे स्व० पिता प्रोफेसर उमाकांत चौधरी जॉर्ज साहब के संबंध में अनेक बातें कहते थे और उस दिन लगा की जॉर्ज साहब सही में एक ऐसे व्यक्तित्व के स्वामी हैं जिन को देखने और सुनने वाला सहज ही सम्मोहित हो जाएगा। मेरे दिवंगत पिता के चुनाव प्रचार के क्रम में जॉर्ज साहब आनंदपुर की एक सभा में आए जहां उनको सुनने का मौका पुनः मिला। जॉर्ज साहब जैसा व्यक्तित्व विरले ही देखने को मिलता है और संगठन शक्ति तो उनमें कमाल की थी। ऐतिहासिक रेल हड़ताल की सफलता उनके नेतृत्व में रेल मजदूरों ने प्राप्त की थी। जिस क्षेत्र में भी जॉर्ज साहब रहें अपना एक अमिट छाप छोड़ गए।।

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