वाराणसी : गंगा के आकाश में गूंजेगी वायुशक्ति की हुंकार, 100 विमानों से सजेगा काशी का आसमान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

वाराणसी : गंगा के आकाश में गूंजेगी वायुशक्ति की हुंकार, 100 विमानों से सजेगा काशी का आसमान

‘विंग्स ओवर गंगा’ में दिखेगा भारतीय वायुसेना का शौर्य, राफेल-सुखोई से तेजस तक भरेंगे उड़ान | सूर्यकिरण के नौ विमान आसमान में उकेरेंगे कलाबाजियों की इबारत, सारंग की सधी उड़ान और हेलीकॉप्टरों की गर्जना बढ़ाएगी रोमांच 

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वाराणसी, 20 अक्टूबर (सुरेश गांधी )। आस्था की नगरी काशी में जब गंगा की लहरों पर सूरज की किरणें उतरेंगी, तब आसमान में भारतीय वायुसेना के शौर्य, सामर्थ्य और सटीकता की एक अलग ही इबारत लिखी जाएगी। नीचे कल-कल बहती गंगा, सामने नमो घाट और ऊपर आसमान को चीरते लड़ाकू विमानों की गर्जना। यह दृश्य केवल हवाई करतबों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित भारतीय वायुसेना की 94 वर्षों की गौरवगाथा का जीवंत रूप होगा। ‘विंग्स ओवर गंगा’ नाम से आयोजित होने वाले इस हवाई प्रदर्शन में 100 विमान अपनी उड़ान से काशी के आकाश को रोमांच, रोमांचक करतबों और देशभक्ति के रंगों से भरेंगे। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस प्रदर्शन में लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता, परिवहन विमानों की रणनीतिक उपयोगिता और हेलीकॉप्टरों की बहुआयामी भूमिका का प्रदर्शन किया जाएगा। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, जगुआर, मिग-29 और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस जैसे विमान अपनी क्षमता का परिचय देंगे। वहीं, चिनूक, अपाचे, एलसीएच और एमआई-17 वी5 जैसे हेलीकॉप्टरों की उड़ान दर्शकों के रोमांच को नई ऊंचाई देगी।


तिरंगे के रंगों से सजेगा गंगा का आसमान

काशी की पहचान केवल मंदिरों, घाटों और आध्यात्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है। यह वह नगरी है जहां परंपरा और आधुनिकता एक साथ सांस लेती हैं। इसी भाव को आकाश में साकार करेगा ‘काशी’ फॉर्मेशन। इसमें तीन किरण विमान विजय के प्रतीक ‘वी’ आकार में उड़ान भरेंगे और गंगा के ऊपर तिरंगे के रंग बिखेरेंगे। आसमान में बनती रंगीन लकीरें देश की आन-बान-शान का संदेश देंगी। इसके बाद राफेल विमान का ‘केदार’ फॉर्मेशन कम ऊंचाई पर सटीक एरोबेटिक करतब दिखाएगा। ‘हनुमान’ कॉलसाइन के साथ सुखोई-30 एमकेआई की दमदार उड़ान और ‘सारनाथ’ के नाम से हार्वर्ड विमान का प्रदर्शन इस आयोजन को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ेगा। इन फॉर्मेशन के नामों में काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई देती है।


राफेल-सुखोई की गर्जना, तेजस की स्वदेशी उड़ान

आकाश में वायुशक्ति का सबसे प्रभावशाली रूप लड़ाकू विमानों की सटीक उड़ान और आपसी तालमेल में दिखाई देगा। ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन में तीन सुखोई-30 एमकेआई विमान विक आकार में उड़ान भरेंगे। इसके बाद चार जगुआर विमानों का ‘पशुपति’ फॉर्मेशन और तीन राफेल विमानों का ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन दर्शकों के सामने आएगा। ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में छह लड़ाकू विमान तीर के अग्रभाग जैसी आकृति में उड़ान भरेंगे। इसमें सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए और मिग-29 जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों की भागीदारी होगी। वायुसेना के अनुसार, यह फॉर्मेशन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित उसकी युद्ध क्षमता, तत्परता और सटीक प्रहार करने की क्षमता को समर्पित है। स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक का प्रतिनिधित्व करेगा ‘अस्सी’ फॉर्मेशन। इसके तहत एलसीए तेजस विमान कम ऊंचाई पर एरोबेटिक प्रदर्शन करेगा। तेजस की उड़ान केवल एक विमान का प्रदर्शन नहीं, बल्कि लड़ाकू विमान निर्माण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकी क्षमता का भी परिचायक होगी।


सारंग की कलाबाजी, सूर्यकिरण की रंगीन लकीरें

हवाई प्रदर्शन में भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम भी अपनी दक्षता और सधे हुए तालमेल का परिचय देगी। हवा में एक-दूसरे के बेहद करीब, नियंत्रित गति और सटीक समन्वय के साथ उड़ते हेलीकॉप्टर दर्शकों को रोमांचित करेंगे। ‘दशाश्व’ फॉर्मेशन में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान नौ सूर्यकिरण हॉक विमानों का नेतृत्व करते हुए मुख्य मंच के ऊपर से गुजरेगा। इसके बाद सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम अपने कौशल का प्रदर्शन करेगी। सूर्यकिरण के विमानों की एक साथ उड़ान, आसमान में बनती आकृतियां और रंगीन धुएं की लकीरें इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होंगी।


गंगा पर पुष्पवर्षा, तिरंगे के साथ उड़ेंगे हेलीकॉप्टर

हवाई प्रदर्शन में केवल लड़ाकू विमानों की शक्ति ही नहीं, बल्कि हेलीकॉप्टरों की बहुआयामी भूमिका भी दिखाई देगी। ‘ओंकार’ फॉर्मेशन में तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर विक आकार में राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायुसेना का ध्वज लेकर उड़ान भरेंगे। इसके बाद ‘गंगा’ फॉर्मेशन में तीन चेतक हेलीकॉप्टर पुष्पवर्षा करेंगे। ‘वरुणा’ फॉर्मेशन में भारतीय वायुसेना और थलसेना के तीन एएलएच मार्क III हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। इस दौरान रस्सियों के सहारे जवानों को नीचे उतारने की स्लिदरिंग प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया जाएगा। यह अभियान विशेष परिस्थितियों में जवानों की त्वरित तैनाती और हेलीकॉप्टरों की परिचालन उपयोगिता को प्रदर्शित करेगा। ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों की भागीदारी होगी। वहीं, ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन में दो चिनूक और दो एएलएच मार्क IV हेलीकॉप्टर उल्टे विक्ट्री आकार में उड़ान भरेंगे। इन प्रस्तुतियों से भारी सामान के परिवहन, सैन्य अभियानों और विभिन्न परिस्थितियों में हेलीकॉप्टरों की उपयोगिता की झलक मिलेगी।


तीनों सेनाओं के समन्वय की गवाही देगा ‘त्रिदेव’

इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पक्ष तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त कार्यशैली और समन्वय का प्रदर्शन भी होगा। ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना का एक कामोव-31 हेलीकॉप्टर सबसे आगे रहेगा। उसके साथ भारतीय वायुसेना और थलसेना के एक-एक एएलएच मार्क III हेलीकॉप्टर विक्ट्री फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। यह प्रस्तुति बताएगी कि देश की सुरक्षा केवल किसी एक सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि थल, जल और नभ की संयुक्त शक्ति का परिणाम है। तीनों सेनाओं के विमानों और हेलीकॉप्टरों का एक साथ उड़ान भरना आपसी तालमेल, साझा प्रशिक्षण और संयुक्त अभियान क्षमता का प्रतीक होगा।


परिवहन विमानों से दिखेगी रणनीतिक पहुंच

हवाई प्रदर्शन में परिवहन और सहायक विमानों की भूमिका भी खास रहेगी। ‘भैरव’ फॉर्मेशन में एक सी-295 और दो डोर्नियर विमान विक्ट्री आकार में उड़ान भरेंगे। ‘कैलाश’ फॉर्मेशन में एक सी-130 और दो एएन-32 विमान शामिल होंगे। ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन में एक एईडब्ल्यूएंडसी विमान दो मिग-29 लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरेगा। ‘महादेव’ फॉर्मेशन में हवा में ईंधन भरने वाला आईएल-78 विमान तीन मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ दिखाई देगा। यह फॉर्मेशन हवा में ही ईंधन भरकर लड़ाकू विमानों की परिचालन क्षमता और उनकी उड़ान अवधि बढ़ाने की तकनीक का परिचय देगा। ‘नटराज’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना का पी-8आई समुद्री निगरानी विमान दो मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरेगा। इससे समुद्री निगरानी और हवाई युद्ध क्षमता के बीच समन्वय का प्रदर्शन होगा।


12 वायु अड्डों से उड़ान भरेंगे 100 विमान

इस हवाई प्रदर्शन में कुल 100 विमान शामिल होंगे। इनमें 52 लड़ाकू विमान, 15 परिवहन विमान, 32 हेलीकॉप्टर और एक ऐतिहासिक विमान शामिल है। इन विमानों की उड़ान देशभर के 12 वायु अड्डों से संचालित होगी। इनमें चेन्नई के निकट स्थित नौसैनिक अड्डा अरक्कोणम भी शामिल है। प्रदर्शन में भारतीय वायुसेना के गरुड़ विशेष बल भी भाग लेंगे। विभिन्न प्रकार के विमानों और हेलीकॉप्टरों की भागीदारी से वायुसेना की व्यापक परिचालन क्षमता, रणनीतिक पहुंच और अलग-अलग परिस्थितियों में अभियान संचालित करने की दक्षता का प्रदर्शन होगा।


काशी की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन

‘काशी’, ‘केदार’, ‘सारनाथ’, ‘विश्वनाथ’, ‘पशुपति’, ‘नीलकंठ’, ‘महादेव’, ‘गंगा’ और ‘भागीरथी’ जैसे नामों से सजे फॉर्मेशन इस आयोजन को काशी की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं। एक ओर सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा की साक्षी गंगा होगी, तो दूसरी ओर आधुनिक भारत की तकनीकी और सामरिक शक्ति का प्रदर्शन करता आसमान। यह दृश्य काशी के लिए इसलिए भी खास होगा कि गंगा के घाटों पर उमड़ने वाली आस्था के बीच देश की सुरक्षा में जुटे वायु योद्धाओं के कौशल को देखने का अवसर मिलेगा। हवाई करतबों के जरिए युवाओं को विमानन, विज्ञान, तकनीक और सशस्त्र सेनाओं में करियर के प्रति प्रेरित करने का उद्देश्य भी इस आयोजन से जुड़ा है। भारतीय वायुसेना की 94 वर्षों की यात्रा त्याग, अनुशासन, साहस और तकनीकी विकास की यात्रा रही है। ‘विंग्स ओवर गंगा’ इसी विरासत को काशी के आकाश में जीवंत करेगा। यहां विमानों की गर्जना केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उस संकल्प की अभिव्यक्ति भी होगी, जिसका ध्येय है— सटीक, अभेद्य और अचूक।

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