रेहान ने कहा, “एक भारतीय कलाकार के तौर पर मुझे लगा कि जो कुछ हो रहा है, उसका दस्तावेजीकरण करना मेरा कर्तव्य है। वे कलाकारों के काम को सेंसर कर रहे हैं। मुझे नहीं पता कि वे किस बात से डरे हुए हैं। उन्होंने भारतीय ध्वज की तस्वीर तक हटा दी।” रेहान ने दावा किया कि बीकानेर हाउस प्रशासन ने तस्वीरें हटाने के पीछे मौजूदा “राजनीतिक माहौल” का हवाला दिया और कहा कि ऐसी तस्वीरों को प्रदर्शित करने का यह सही समय नहीं है। रेहान ने कहा, “मैंने तर्क दिया कि आप यह नहीं कह सकते कि राजनीतिक कला प्रदर्शित न करें, क्योंकि सारी कला राजनीतिक होती है। राजनीति के बिना कोई कला नहीं है।” रेहान की मां और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने तस्वीरें हटाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह हास्यास्पद है। वे देशभर के युवाओं की आवाज को दबा रहे हैं। इसलिए यह स्वाभाविक ही है कि वे किसी के साथ भी ऐसा करेंगे।” प्रियंका ने कहा, “विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी उसकी (रेहान) तस्वीरों में न तो कोई टिप्पणी थी और न ही किसी के खिलाफ कुछ अपमानजनक था। वे सिर्फ विरोध-प्रदर्शन का दृश्य के जरिये किया गया दस्तावेजीकरण थीं। स्पष्ट रूप से यही उनका (सरकार) तरीका है। अब लोकतंत्र नहीं रहा। आज यह उसके साथ हुआ है, कल किसी और कलाकार के साथ होगा।”
रेहान ने एक बयान में कहा कि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने प्रदर्शनी के उद्घाटन से कुछ घंटे पहले विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों की “राजनीतिक प्रकृति” पर आपत्ति जताई और उन्हें हटाने का अनुरोध किया। रेहान ने कहा कि प्रदर्शनी का विस्तृत प्रस्ताव और लेआउट पहले ही प्रबंधन के साथ साझा किया जा चुका था, इसलिए उद्घाटन से 24 घंटे से भी कम समय पहले लगभग 50 प्रतिशत कलाकृतियों को हटाने का अनुरोध करना उचित नहीं था। बीकानेर हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि वह इस मामले पर टिप्पणी करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। बीकानेर हाउस के सीसीए भवन की पहली मंजिल पर स्थित दो बड़े कमरों की दीवारों से करीब 74 तस्वीरें हटाए जाने के बाद वहां तस्वीरों की जगह लगी कीलें नजर आ रही थीं। दीवारों पर संविधान की प्रस्तावना अंकित थी। प्रदर्शनी रविवार तक जारी रहेगी और तस्वीरें हटाए जाने के बावजूद इसका आयोजन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जा रहा है।

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