पटना : खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य, मत्स्य पालन एवं पशुपालन के प्रति किया गया जागरूक - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

पटना : खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य, मत्स्य पालन एवं पशुपालन के प्रति किया गया जागरूक

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पटना, 23 अक्टूबर, (रजनीश के झा) । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड के कराई गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुल 56 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 31 पुरुष एवं 25 महिलाएं शामिल थीं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रमुख, सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार प्रभाग  ने किसानों को यूरिया, डीएपी एवं अन्य रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक और अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा ढैंचा जैसी हरी खाद, जीवामृत और गोबर की खाद जैसे जैविक संसाधनों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जैविक खादों के नियमित उपयोग से मिट्टी की संरचना, जैविक कार्बन की मात्रा एवं जल धारण क्षमता में सुधार होता है, जिससे भूमि की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से फसल चक्र एवं अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की अपील की।


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डॉ. बिश्वजीत देबनाथ, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने किसानों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन, तालाब प्रबंधन तथा मछली उत्पादन बढ़ाने की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने मत्स्य पालन को आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए किसानों को इससे संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तथा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. राकेश कुमार, वैज्ञानिक ने किसानों को पशुपालन से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं उनके लाभों की जानकारी दी। उन्होंने पशुओं के संतुलित पोषण, खनिज मिश्रण एवं कैल्शियम सप्लीमेंट के उचित उपयोग, नियमित कृमिनाशन तथा समय पर टीकाकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य एवं पोषण का उचित प्रबंधन करने पर जोर देते हुए बताया कि इससे उनकी उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिलती है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा वैज्ञानिक मत्स्य पालन एवं पशुधन प्रबंधन के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना था। इसके साथ ही, किसानों को कृषि संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

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