वहीं, सितंबर में खनन एवं संबद्ध क्षेत्र के उत्पादन में 6.2 प्रतिशत की गिरावट आई। अगस्त में भी इस क्षेत्र का उत्पादन 4.6 प्रतिशत घटा था। विनिर्माण क्षेत्र का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में करीब 76 प्रतिशत भारांक है। इस क्षेत्र की वृद्धि दर अगस्त में 8.6 प्रतिशत रही थी। एनएसओ के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 17 ने सितंबर में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें मोटर वाहन, ट्रेलर एवं सेमी-ट्रेलर का विनिर्माण, बिजली के उपकरणों का विनिर्माण तथा रबड़ और प्लास्टिक उत्पादों का विनिर्माण प्रमुख योगदान देने वाले क्षेत्र रहे। उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, सितंबर में प्राथमिक वस्तुओं के उत्पादन में चार प्रतिशत, पूंजीगत वस्तुओं में 10.4 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुओं में 12.2 प्रतिशत और बुनियादी ढांचा एवं निर्माण वस्तुओं में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी दौरान टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में छह प्रतिशत और गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि में मध्यवर्ती, प्राथमिक और पूंजीगत वस्तुओं का सबसे अधिक योगदान रहा। सितंबर के आंकड़े आने के साथ ही चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही।
पीडब्ल्यूसी इंडिया के आर्थिक सलाहकार विभाग के भागीदार एवं प्रमुख रानेन बनर्जी ने इन आंकड़ों पर कहा कि खनन एवं संबद्ध क्षेत्र में गिरावट और टिकाऊ उपभोक्ता तथा पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन की रफ्तार का सुस्त पड़ना औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटने की प्रमुख वजहें हैं। बनर्जी ने कहा, ‘‘त्योहारों की बिक्री की उम्मीद में अगस्त में उत्पादन बढ़ाया गया था। इसके अलावा, जीएसटी दरों के युक्तिकरण से खपत को मिले शुरुआती प्रोत्साहन का असर धीरे-धीरे कम होना और पिछले साल के ऊंचे आधार ने भी सितंबर के आंकड़ों को प्रभावित किया।’’ हालांकि, क्रिसिल की वरिष्ठ निदेशक एवं प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि सितंबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने के बावजूद उत्पादन की स्थिति मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मासिक आधार पर नरमी की मुख्य वजह पिछले साल का ऊंचा आधार और खनन एवं बिजली उत्पादन में कुछ सुस्ती रही। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने भी कहा कि आधार प्रभाव और खनन क्षेत्र की नकारात्मक वृद्धि से सितंबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि आधार प्रभाव की वजह से अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर बढ़कर आठ से नौ प्रतिशत के दायरे में रह सकती है।’’

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