दिल्ली: धनशोधन आरोपों के खिलाफ लालू प्रसाद की याचिका पर अदालत ने ईडी का रुख पूछा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

दिल्ली: धनशोधन आरोपों के खिलाफ लालू प्रसाद की याचिका पर अदालत ने ईडी का रुख पूछा

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नई दिल्ली । उच्च न्यायालय ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) से जुड़े कथित घोटाला मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद के खिलाफ धनशोधन के आरोप तय करने संबंधी अधीनस्थ अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का रुख जानना चाहा। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने अधीनस्थ अदालत के 10 सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली प्रसाद की याचिका पर जांच एजेंसी को नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई तीन दिसंबर को होगी। ईडी का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी पर आधारित है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि लालू प्रसाद ने 2004 से 2014 के बीच खुद और अन्य लोगों को ‘‘अनुचित आर्थिक लाभ’’ पहुंचाने के लिए अपने करीबी सहयोगी और राज्यसभा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्य प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी तथा सुजाता होटल्स की मालिक सरला गुप्ता तथा आईआरसीटीसी के अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश रची थी।


अपनी याचिका में प्रसाद ने कहा है कि अधीनस्थ अदालत ने उनके खिलाफ धन शोधन के आरोप महज इसलिए तय किए क्योंकि उनके खिलाफ अनुसूचित अपराध में आरोप तय किए गए थे, जबकि रिकॉर्ड में यह बात दर्ज है कि राजद नेता ‘‘कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया या गतिविधि में कभी शामिल नहीं रहे’’। याचिका में कहा गया है कि अधीनस्थ अदालत का आदेश प्रथमदृष्टया त्रुटिपूर्ण और कानूनी रूप से टिकाऊ प्रतीत नहीं होता। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि ईडी ने कभी भी जांच के लिए प्रसाद को समन नहीं भेजा था जिससे यह पता चलता है कि वह कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं थे। अधीनस्थ अदालत ने 10 सितंबर को इस मामले में प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और छह अन्य लोगों के खिलाफ धनशोधन के आरोप तय करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा कि 2005 से 2014 के बीच के ईडी के आरोप साफ तौर पर इशारा करते हैं कि प्रसाद के नेतृत्व में रेलवे अधिकारियों ने रांची और पुरी में स्थित रेलवे के होटलों को पट्टे पर देने के लिए सुजाता होटल्स के पक्ष में निविदा प्रक्रिया में हेरफेर की थी। अधीनस्थ अदालत ने कुल 16 आरोपियों में से सात को आरोपमुक्त कर दिया था। इससे पहले, पिछले साल अक्टूबर में सीबीआई के एक मामले में अधीनस्थ अदालत ने कथित घोटाले को लेकर राजद प्रमुख और 11 अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे।

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