कांग्रेस के मुकुल वासनिक शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी समिति के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है। भाजपा के राधा मोहन सिंह रक्षा संबंधी समिति के अध्यक्ष होंगे। जनता दल (यू) के संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी समिति का अध्यक्ष फिर से नियुक्त किया गया है, जबकि शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बारणे ऊर्जा संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। भाजपा के सुजीत कुमार ने पार्टी के सांसद बृजलाल का स्थान लेते हुए कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय संबंधी समिति की अध्यक्षता संभाली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को फिर से कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। भाजपा के राजीव प्रताप रूडी जल संसाधन संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे।भाजपा के भर्तृहरि महताब वित्त संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि राधा मोहन दास अग्रवाल को गृह मामलों संबंधी समिति के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है। भाजपा के निशिकांत दुबे को फिर से संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। महाराष्ट्र से भाजपा सांसद मेधा विश्राम कुलकर्णी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी समिति की अध्यक्ष बनी रहेंगी। भाजपा के सुधीर गुप्ता ने पार्टी के ही सी एम रमेश का स्थान लेते हुए रेल संबंधी समिति की अध्यक्षता संभाली है। कांग्रेस के सप्तगिरि शंकर उलाका को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी समिति का अध्यक्ष पुन: नियुक्त किया गया है। भाजपा के पी सी मोहन को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता संबंधी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि भाजपा सांसद शशांक मणि को श्रम, वस्त्र एवं कौशल विकास संबंधी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। दोनों सदनों की कुल 24 विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समितियों में से आठ राज्यसभा के सभापति के अधीन और 16 लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशन एवं नियंत्रण में काम करती हैं।
नई दिल्ली। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को विभिन्न विभागों से संबंधित संसद की स्थायी समितियों के 2026-27 के लिए हुए पुनर्गठन में दो समितियों की अध्यक्षता गंवानी पड़ी है। पार्टी के भीतर सांसदों की बगावत और टूट के बीच यह बदलाव हुआ है। राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन किया। भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी को वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने तृणमूल की डोला सेन का स्थान लिया है। वहीं, तृणमूल के बागी धड़े की नेता काकोली घोष दस्तीदार को रसायन एवं उर्वरक संबंधी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने अपने पूर्व पार्टी सहयोगी कीर्ति आजाद का स्थान लिया है। तृणमूल के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने समितियों के पुनर्गठन में अपनी पार्टी के साथ किए गए व्यवहार पर सवाल उठाते हुए सभापति सी पी राधाकृष्णन को पत्र लिखा है। ओ’ब्रायन ने कहा कि राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके बाद कांग्रेस और तृणमूल क्रमश: दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी पार्टियां हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल ने 2024-25 और 2025-26 में संसदीय समितियों की अध्यक्षता की थी, लेकिन अब उससे ये पद ले लिये गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह पहली बार नहीं है जब हमारे साथ इस तरह का व्यवहार किया गया है। वर्ष 2019 में भी, जब हम राज्यसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी थे, हमें इससे वंचित किया गया था। कुछ साल बाद इसे ठीक किया गया और अब स्थिति फिर वहीं पहुंच गई है।’’ ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि इन और कई अन्य कारणों से संसद को ‘‘एक अंधकार कक्ष’’ में बदला जा रहा है। द्रमुक के तिरुचि शिवा और के कनिमोझी को क्रमश: उद्योग तथा खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण संबंधी समितियों के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है।भाजपा के प्रमुख सहयोगी दलों -जनता दल (यूनाइटेड), शिवसेना और तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा)- के नेताओं को भी विभिन्न समितियों के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है। कांग्रेस के शशि थरूर और चरणजीत सिंह चन्नी को क्रमश: विदेश मामलों और कृषि संबंधी समितियों के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है।

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